रविन्द्र जडेजा : वर्ल्ड कप से पहले क्यों बने टीम इंडिया के लिए अबूझ पहेली
भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज में रवींद्र जडेजा का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, सवाल उनकी काबिलियत या अनुभव पर नहीं, बल्कि वर्ल्ड कप की तैयारियों के बीच टीम में उनकी भूमिका को लेकर है।

गुवाहाटी वनडे में जडेजा के चेहरे पर आमतौर पर नजर आने वाला शांत भाव कई मौकों पर गायब दिखा। पहली पारी के दौरान विकेटकीपर केएल राहुल एक मुश्किल कैच पकड़ने से चूक गए तो जडेजा ने निराशा में दोनों हाथ सिर पर रख लिए। कुछ ही सेकंड बाद रिबाउंड हुई गेंद शॉर्ट थर्ड मैन के पास से भी निकल गई।
करीब एक घंटे बाद जडेजा ने फिर अपने दोनों हाथ सिर पर रखे, लेकिन इस बार वजह निराशा नहीं बल्कि खुशी थी। विकेट लेने के बाद उन्होंने छोटा सा डांस किया। उनका यह जश्न अभिनेता इमरान हाशमी की आने वाली फिल्म की ओर इशारा माना गया।
जडेजा के लिए यह जश्न इसलिए भी खास था क्योंकि काफी समय बाद उन्होंने वनडे में विकेट हासिल किया था। उनका पिछला वनडे विकेट दिसंबर 2025 में आया था, जबकि उससे पहले उन्होंने मार्च 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में विकेट लिया था।
गुवाहाटी की पिच ने गेंदबाजों की बढ़ाई मुश्किल
गुवाहाटी वनडे दोनों टीमों के गेंदबाजों के लिए मुश्किल दिन रहा। भारत ने वनडे क्रिकेट में तीसरी बार एक पारी में 400 रन लुटाए। जब भारत ने पहली बार 2009 में वनडे में 400 रन दिए थे, उस मुकाबले में भी जडेजा भारतीय गेंदबाजी का हिस्सा थे।
गुवाहाटी की पिच बल्लेबाजों के लिए बेहद अनुकूल थी और गेंदबाजों को ज्यादा मदद नहीं मिली। भारत ने ऐसे हालात में अपनी बेंच स्ट्रेंथ और टीम संयोजन को परखने की कोशिश की। वर्ल्ड कप तक पहुंचने वाले अगले 12 महीनों में प्रयोग के लिए उपलब्ध समय लगातार कम होता जाएगा। ऐसे में घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज टीम के लिए अलग-अलग विकल्प आजमाने का मौका भी है।
लेकिन 37 साल की उम्र और 212 वनडे मैचों के अनुभव के बाद जडेजा को किसी ट्रायल की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अनुभव के मामले में वह टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं। पहले वनडे से पहले बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी जडेजा का नाम विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे खिलाड़ियों के साथ लिया था।
आंकड़ों में भी जडेजा का लंबा अनुभव साफ नजर आता है। भारतीय स्पिनरों में वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में वह तीसरे स्थान पर हैं। वह टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनका लंबा रिकॉर्ड उन्हें भारतीय क्रिकेट के प्रमुख ऑलराउंडरों में शामिल करता है।
असली सवाल जडेजा की भूमिका का
भारत की बल्लेबाजी जहां वेस्टइंडीज के खिलाफ मजबूत नजर आ रही है, वहीं अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर एशियन गेम्स के लिए जापान में हैं। इन दोनों फिंगर स्पिन ऑलराउंडरों को हाल के कुछ मौकों पर जडेजा से ऊपर प्राथमिकता दी गई थी।
अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज और इंग्लैंड दौरे में भी अक्षर और वॉशिंगटन को मौका मिला। आईपीएल के बाद एक और बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर हर्ष दुबे को मौका दिए जाने से ऐसा लगा कि भारतीय टीम वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए भविष्य के विकल्पों को परख रही है।
हालांकि, इसके बाद जडेजा की वनडे टीम में वापसी हुई। न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में खेली गई पिछली वनडे सीरीज में उन्होंने 23 ओवर गेंदबाजी की थी, जिसमें 141 रन खर्च किए और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला। वहीं, दूसरे स्पिन ऑलराउंडर के विकल्प के तौर पर भारत ने नमन धीर को प्राथमिकता दी।
इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि वर्ल्ड कप की योजना में जडेजा की भूमिका आखिर क्या होगी—मुख्य स्पिन ऑलराउंडर, रन रोकने वाले गेंदबाज या परिस्थितियों के हिसाब से इस्तेमाल किए जाने वाले अनुभवी विकल्प?
जडेजा की गेंदबाजी शैली में बदलाव की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में फिंगर स्पिनरों ने अपनी गेंदबाजी में बदलाव करने की कोशिश की है। लेकिन जडेजा ने अपनी मूल शैली को काफी हद तक बरकरार रखा है।
उनकी सबसे बड़ी ताकत लगातार एक जैसी गति से गेंद डालना और विकेट पर बेहद सटीक गेंदबाजी करना रही है। वनडे क्रिकेट अब पहले की तुलना में कम खेला जाता है और कई मुकाबलों में टी20 क्रिकेट जैसी तेज बल्लेबाजी देखने को मिलती है। इसके बावजूद जडेजा की गेंदबाजी शैली में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी।
लेकिन तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी जैसी सपाट पिचों पर जब गेंद से टर्न या अतिरिक्त मदद नहीं मिलती, तो उनकी गेंदबाजी का असर कम हो सकता है। गुवाहाटी में स्टंप माइक पर रोहित शर्मा को भी जडेजा को थोड़ा धीमा गेंद डालने की सलाह देते हुए सुना गया था, क्योंकि उनकी सामान्य गति से गेंद बल्लेबाजों के लिए आसानी से बल्ले पर आ रही थी।
2023 वर्ल्ड कप के बाद जडेजा का प्रदर्शन
| सीरीज/टूर्नामेंट | पारी | विकेट | सर्वश्रेष्ठ | औसत | इकॉनमी | स्ट्राइक रेट |
|---|---|---|---|---|---|---|
| वर्ल्ड कप 2023 | 11 | 16 | 5/33 | 24.87 | 4.25 | 35 |
| इंग्लैंड के खिलाफ, भारत 2025 | 2 | 6 | 3/26 | 10.16 | 3.21 | 19 |
| चैंपियंस ट्रॉफी 2025 | 5 | 5 | 2/40 | 36.6 | 4.35 | 50 |
| दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, भारत 2025 | 3 | 1 | 1/50 | 157 | 6.28 | — |
| न्यूजीलैंड के खिलाफ, भारत 2026 | 3 | 0 | — | — | 6.13 | — |
| वेस्टइंडीज के खिलाफ, भारत 2026 | 2 | 2 | 2/75 | 64.5 | 6.45 | 60 |
पहले वनडे में जडेजा को नौवें ओवर में गेंदबाजी के लिए लाया गया। जॉन कैंपबेल ने उनके पहले ही ओवर में 16 रन बटोर लिए। उन्होंने स्वीप शॉट के साथ-साथ आगे बढ़कर भी जडेजा पर दबाव बनाया।
दूसरे छोर से कुलदीप यादव ने नियंत्रण बनाए रखा और बाद में विकेट भी हासिल किए। इससे जडेजा को रन रोकने की भूमिका निभाने का मौका मिला। पुरानी गेंद के साथ पिच से थोड़ी पकड़ मिलने पर वह अपनी भूमिका निभाने में सफल रहे।
लेकिन नमन धीर भी लगभग इसी तरह की भूमिका निभा रहे थे और नीतीश कुमार रेड्डी भी ज्यादा प्रभावी नजर नहीं आए। ऐसे में भारत का बाकी गेंदबाजी आक्रमण दबाव में आ गया।
दूसरे वनडे में जडेजा ने शुरुआत में सीधी और तेज गेंदबाजी की। जॉन कैंपबेल, जो पहले ही 40 गेंदों में 69 रन बना चुके थे, दूसरी गेंद पर आगे बढ़े और एक रन लिया। इसी ओवर में उन्होंने स्लॉट में आई गेंद पर आसान छक्का भी लगाया।
हालांकि, इस मुकाबले में जडेजा ही नहीं बल्कि किसी भी गेंदबाज को पिच से ज्यादा मदद नहीं मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने लेग साइड की ओर सीधी लाइन में गेंद डालकर बाएं हाथ के बल्लेबाज को शॉट खेलने के लिए कम जगह देने की कोशिश की। लेकिन इस रणनीति में जोखिम भी था और एक ही ओवर में पांच वाइड हो गईं।
वर्ल्ड कप से पहले जडेजा का रोल सबसे अहम सवाल
रवींद्र जडेजा के अनुभव, रिकॉर्ड और ऑलराउंड क्षमता पर सवाल नहीं है। असली चुनौती यह तय करना है कि भारत की मौजूदा टीम संरचना में उनका सबसे प्रभावी इस्तेमाल किस तरह किया जाए।
अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और नमन धीर जैसे विकल्पों के मौजूद होने से टीम मैनेजमेंट के पास कई विकल्प हैं। ऐसे में आने वाली वनडे सीरीज में जडेजा की गेंदबाजी, बल्लेबाजी और टीम संयोजन में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।
वर्ल्ड कप की तैयारियां आगे बढ़ने के साथ प्रयोग की गुंजाइश कम होती जाएगी। ऐसे में जडेजा के अनुभव और मौजूदा टीम संयोजन के बीच सही संतुलन बनाना भारतीय टीम की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
